राजस्थान: बजट से पहले ही विधानसभा के बाहर अनशन शुरू

32

-समझौते लागू करने की मांग को लेकर सरकार को अल्टीमेटम

-कई सामाजिक संगठनों ने अनशन को दिया समर्थन

जयपुर,।

राजस्थान में सम्पूर्ण शराबबंदी, सशक्त लोकायुक्त कानून और दिवंगत पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा को शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर रविवार को जनक्रांति मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विधानसभा स्थित ज्योति नगर पॉइंट पर आमरण अनशन की शुरुआत की।

अनशन के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा छाबड़ा ने कहा की मेरे द्वारा पूर्व में किये गए अनशन के दौरान लिखित समझौते को करीब दो साल बाद भी सरकार ने लागू नहीं किया। उन्होंने कहा की प्रदेश की भाजपा की सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। राजस्थान में शराबबंदी की मांग को लेकर पूर्व विधायक स्व. छाबड़ा ने आंदोलनरूपी लौ जलाई थी।

उन्होंने शराबबंदी के लिए अपने प्राणो को न्यौछावर कर दिया। लेकिन सरकार ने हठधर्मिता दिखाते हुए उनके साथ किए गए शराबबंदी लागू करने के समझौते को भी दरकिनार कर दिया। स्व. छाबड़ा की जलाई गई लौ को पूरे राजस्थान में पहुंचाने के लिए उन्होंने यह आंदोलन चलाया है और राजस्थान में शराबबंदी लागू होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार को चेताया है कि इस बार आर पार की लड़ाई होगी। फिर चाहे सरकार दमनकारी नीति अपनाये। पूजा छाबड़ा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आमरण अनशन में अधिक से अधिक संख्या में हिस्सा लेकर महाआंदोलन में भागीदारी निभाए।

दावा किया गया है कि प्रशासन ने सरकार के दबाव में आकर जनक्रांति मंच को अनुमति नहीं दी, लेकिन इसके बावजूद पूजा छाबड़ा ने अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यदि प्रशासन उन्हें आमरण अनशन से गिरफ्तार करता है तो वे जेल में भी अपना अनशन जारी रखेंगी।

उन्होंने कहा की इस आमरण अनशन में उनको बलिदान देने की जरुरत पड़ी तो वह प्रदेश की जनता के लिए अपने प्राण त्याग देगी। छाबड़ा ने बताया कि शहीद स्व. छाबड़ा के शराबबंदी के सपने को पूरा करने के लिए मैंने पूरे राजस्थान में जनजागृति की मुहिम चलाई है और आज वह मुहिम जनआंदोलन बन चुकी है।

पुरुष ही नहीं, महिलाएं भी घरों से बाहर निकलकर शराबबंदी की इस लड़ाई में उनका समर्थन कर रही है। छाबड़ा ने बताया कि शहीद छाबड़ा ने राजस्थान में साल 1979 से 1981 तक ढाई साल तक शराबबंदी लागू करवाई थी। गुरुशरण छाबड़ा ने शराबबंदी के लिए 14 बार अनशन किया था।

दावा किया है कि उनके हर आंदोलन में पूजा छाबड़ा ने कंधे से कंधे मिलाकर साथ दिया। भाजपा शासन के तानाशाही रवैये के कारण गुरुशरण अनशन के दौरान शहीद हो गए। उनके बाद पूजा छाबड़ा ने गुरुशरण जी के सपने को पूरा करने के लिए 23 नवम्बर 2015 को सीएम हाउस के बाहर अनशन शुरू किया था।

करीब आठ दिन तक चले अनशन के बाद 30 नवम्बर 2015 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी और मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने पूजा छाबड़ा के साथ एक लिखित समझौता किया था। समझौता पत्र के तहत हुई सहमति को तीन माह में लागू करना था।

लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी लागू नहीं हुआ। छाबड़ा ने पूर्व में सरकार के मंत्रियों के साथ लिखित समझौते को लागू करने की मांग को लेकर आमरण अनशन रविवार से शुरू कर दिया है।

इस मौके पर राजस्थान होमगार्ड संघ के प्रदेश अध्यक्ष झलकन सिंह राठोड, अलवर के प्रसिद्ध गुलाबी टीम की अध्यक्ष प्रेमलता, उपाध्यक्ष मधु जैन, सानिया खान, मुस्लिम संघ के प्रदेश अध्यक्ष हाफिज मंजूर खान, राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता रविन्द्र सपोटरा, करोली जिलाध्यक्ष बबलेश मीणा, आम आदमी पार्टी राजस्थान सयोंजक पूनम चंद भंडारी, पूर्व सयोंजक कमलेश सकसेना, बैला हांडा शर्मा समेत कई लोग मौजूद थे!

कई संगठनों ने दिया समर्थन….

आम आदमी पार्टी, राजस्थान होमगार्ड संघ, मुस्लिम संघ,गुलाबी टीम सहित कई संगठनों के पदाधिकारियों ने पूजा छाबड़ा के आमरण अनशन का समर्थन दिया है।

खबर को अपने facebook or whatsapp groups में शेयर कीजिये। play store से Nationaldunia का मोबाइल एप्प इंस्टॉल कीजिये और पाइये ताज़ा खबरें।

Facebook Comments
SHARE