राजस्थान: संस्कृत शिक्षा में पदस्थापन का घपला

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-संस्कृत शिक्षा में हो रहे पदस्थापन मे भारी अनियमिताएं
-चेहतों को पदास्थापन के लिए विधालयों मे मनमर्जी से पद बढाए

जयपुर। संस्कृत शिक्षा में शिक्षकों के पदस्थापना के मामले में घपला सामने आया है। विभाग में एक दशक के बाद 1829 तृतीय श्रेणी शिक्षको की भर्ती हुई है, जिनके पदस्थापन बिना किसी प्रमाणिक मानदण्डों के किये जा रहे हैं।

गौरतलब है कि प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा मे सभी श्रेणियों के पदस्थापन, काउंसलिंग पद्धति से किये जा रहे हैं। जिससे कि पारदर्शिता बनी रहे और अन्य विभागों में भी इसी तरह से पदस्थापना हो रहे हैं। लेकिन विडम्बना देखिये, संस्कृत शिक्षा में अधिकारियों ने अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए मनमर्जी से पदस्थापन कर दिए। अपने चेहतों के लिए विद्यालयों मे आवश्यकता से अधिक पद सृजन कर पदास्थापन दे दिये।

एकल महिलाओं, विधवाओं, परित्यक्ता का पदास्थापन मे वरियता का ध्यान नहीं रखा, उन्हें सूदूर स्थानों पर लगाया गया है।

बताया जा रहा है कि मेरिट को दरनिकार कर पदास्थापन किये गये हैं। जिससे नवनियुक्त शिक्षकों में भारी आक्रोश है। साथ ही पारदर्शिता पर प्रश्न चिह्न खड़े हो गये हैं। मसलन जिस कृष्ण कुमार बालाणी की मेरिट क्रमांक 10 था, उसे गृह जिला नहीं देकर उसे नागौर में पोस्टिंग दी है।

इसी प्रकार मेरिट क्रमांक 3, 22, 11 को गृह जिला आवंटित नहीं दे कर के इन्हें दूरदराज के जिलों में पोस्टिंग दी है। वहीं, विकास कुमार अभ्यर्थी, जिसकी मेरिट क्रमांक 261 है, उसे गृह जिला आवंटित किया है। इसी प्रकार मेरिट क्रमांक 145, 152, 207, 331, 426 इन्हें गृह जिला आवंटित किया है।

गौरतलब है कि वर्तमान सत्र में शिक्षकों के अभाव में जिन विद्यालयों में तालाबंदी हुई, उन्हें अनदेखा कर जहां पर्याप्त शिक्षक पहले से ही मौजूद हैं, शहर के नजदीक, वहां अपने चहेतों को पोस्टिंग देकर अनियमितता की है।

इस मामले को लेकर राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शशिभूषण शर्मा ने अधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया है। शर्मा ने कहा है कि जो विद्यालय मानवीय संसाधनों के विहीन चल रहे हैं, जो इस भर्ती के बाद भी संसाधन विहीन रहे हैं, जहां शिक्षकों के पद रिक्त नही थे, वहां पदस्थापन कर उन छात्रों के साथ घोर अन्याय किया है। जो वर्षों से शिक्षकों की बाट जो रहे है, वह अब भी वैसे ही हैं।

संघठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने संस्कृत शिक्षा में हुई पदस्थापन अनियमियताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की हैं कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाएं। उन्होंने मांग की है कि इस अनियमितता मे लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।

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