सियासत का कहकहा: BJP ने कहीं संघ से किनारा तो नहीं किया?

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-राज्यसभा चुनाव का मामला
-संघ की पसंद को नहीं मिला मौका, कई नेताओं ने की पैरवी पर नहीं बनी बात

जयपुर। राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने तीनों प्रत्याशियों की घोषणा के बाद सोमवार को नामांकन भी दाखिल कर दिया, मगर ऐसा लग रहा है कि इस पूरे प्रकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसन्द को पार्टी ने किनारा कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि RSS की पसंद एक प्रत्याशी ने आखिरी वक्त तक कई नेताओं से पैरवी करवाई, मगर केन्द्रीय व प्रदेश संगठन ने संघ के प्रत्याशी को दरकिनार कर मदन लाल सैनी को अपना अंतिम प्रत्याशी घोषित कर दिया। हालांकि मदन लाल सैनी भी RSS के कर्मठ कार्यकर्ता हैं। विशेष सूत्रों से खबर मिली है कि राजस्थान कोटे की तीन सीटों में से एक सीट पर संघ की पसंद का चेहरा राज्यसभा जाने वाला था, और वह चेहरा मदन लाल सैनी नहीं थे।

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इसमें पहला चेहरा केबीनेट मंत्री राजपाल शेखावत का था, लेकिन उनकी इंकार के बाद हिंद हिमालय सांस्कृतिक संबधी परिषद के अध्यक्ष राणा शिव सिंह सिसोदिया का माना जा रहा था। संघ से लंबे समय से जुड़े राणा ग्रेटर कैलाश मिशन के भी सदस्य है।

RSS ने स्वदेशी जागरण मंच के अध्यक्ष नरेन्द्र पूनिया से इस संबंध में फीडबैक लिया था। उन्होने संघ को बताया था कि आंनदपाल प्रकरण व पदमावत फिल्म के बाद राजस्थान में राजपूत समाज में पार्टी के लिए असंतोष है, इसलिए एक सीट राजपूत समाज की तरफ से जाए। बताया जा रहा है कि संघ प्रमुख ने अन्य नेताओं से फीडबैक लेने के बाद राजपाल व राणा शिव सिंह का नाम तय किया था।

राजपाल सिंह शेखावत के इंकार के बाद आरएसएस व राजपूतों की तरफ से राणा शिव सिंह का नाम न केवल सुर्खियों में था, बल्कि लगभग तय बताया जा रहा था। पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में भी यह नाम आया था। उसके बावजूद अंतिम दिन केन्द्रीय संगठन के निर्देश पर संगठन मंत्री ने स्थानीय फीडबैक के आधार पर मदन लाल सैनी का नाम भेजा, जिससे स्वीकार कर लिया गया।

माना जा रहा है कि संघ की पसंद को तरहीज नहीं दिए जाने पर एक बार फिर से पार्टी व संघ के बीच दरार बढ़ सकती है। बताया तो यहां तक जा रहा है कि राणा को संघ प्रमुख समेत, इंद्रेश कुमार, नरेन्द्र पूनिया, मेवाड़ राज परिवार समेत राजस्थान के कई राजपूत विधायकों का का समर्थन था।

-इनका कहना है
मैं संघ की पंसद का प्रत्याशी था, पूरे फीडबैक के बाद मेरा नाम तय किया गया था। पर केन्द्रीय संगठन ने स्थानीय संगठन के आधी-अधूरी जानकारी के बाद संघ की पसंद को दरकिनार किया, जिसका खामियाजा आगामी चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

राणा शिव सिंह सिसोदिया, अध्यक्ष, हिंद हिमालय सांस्कृतिक संबंधी परिषद।

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