‘जादूगर’ अशोक गहलोत का कर्नाटक में भी सिर चढ़कर बोला ‘जादू’!

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जयपुर।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अशोक गहलोत सियासी जादू कर्नाटक में भी सिर चढ़कर बोला। कांग्रेस कर्नाटक में दूसरे नंबर की पार्टी रही, लेकिन सही समय पर अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद की जोड़ी द्वारा सही निर्णय लिए जाने के कारण भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भी सरकार बनाने का दावा करने में अब तक नाकाम हो रही है।

हालांकि, अभी तक बीजेपी की तरफ से अपने पत्ते नहीं खोले गए हैं, लेकिन जिस तरह से परिणाम आने के तुरंत बाद कांग्रेस ने फुर्ती दिखाते हुए एचडी देवगौड़ा की जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया, वह कहीं ना कहीं अशोक गहलोत की परिपक्व सियासी रणनीति को दर्शाता है। अशोक गहलोत ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम की न केवल सोनिया गांधी को पल-पल की जानकारी दी, बल्कि कांग्रेस के सत्ता से हटने की संभावनाओं को ध्यान नहीं रखते हुए तुरंत प्रभाव से सोनिया गांधी को यह बात भी समझाने में कामयाब रहे कि बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस को एच डी देवेगौड़ा वाली जेडीएस को समर्थन देकर सरकार बनाने का निमंत्रण देना चाहिए। जिसके बाद सोनिया गांधी ने तुरंत एच डी देवगौड़ा को फोन करके उनके बेटे कुमारास्वामी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कहते हुए कांग्रेस के द्वारा बाहर से समर्थन देने का प्रस्ताव दे दिया गया।

कांग्रेस का यह कदम बिल्कुल वैसा ही माना जा रहा है, जैसे गोवा में छोटी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी ने सियासी रणनीति का परिचय देते हुए सरकार बनाई। उसके बाद हद तो तब हो गई, जब मणिपुर में केवल 2 सीट होने पर भी सत्ता हासिल करने में बीजेपी ने कामयाबी पाई। देर-सवेर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की इस रणनीति को अपनाते हुए कर्नाटक में BJP के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी।

इससे पहले चुनाव परिणाम आने के 1 दिन पहले ही 14 मई को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत कर्नाटक पहुंच गए थे। उनके साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद भी कर्नाटक पहुंच गए। दोनों नेताओं ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों में पल-पल की गतिविधियों पर पैनी नजर रखते हुए बीजेपी पर इस करारे सियासी हमले को अंजाम दिया।

इसके बाद एचडी देवगौड़ा के बेटे कुमारास्वामी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर शाम को 5:30 से 6:00 बजे तक के बीच मिलने का समय मांग लिया। उन्होंने पत्र में लिखा कि कांग्रेस पार्टी के सभी विधायक उनको समर्थन दे रहे हैं और वही समर्थन पत्र राज्यपाल के समक्ष पेश करते हुई वह अपनी सरकार बनाने का दावा पेश करने आ रहे हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने वह गलती की, जो अक्सर कांग्रेस करती आई है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व में अपने दूत कर्नाटक पहुंचाने में काफी देरी कर दी। शायद बीजेपी आलाकमान को यह आभास था, कि वह बहुमत से सत्ता हासिल कर लेगी। जिसके चलते उन्होंने यह ढिलाई बरती। उनकी इस बात के सबूत दोपहर तक मिले परिणाम के रुझानों से और पुख्ता हो गए थे, लेकिन अंतिम नतीजे आने तक bjp सत्ता से महज 7 सीट दूर रह गई। बीजेपी को चुनाव परिणाम के बाद 104 सीट हासिल हुई, कांग्रेस को 78 और जीडीएस को 38 सीटों पर कामयाबी मिली। 2 सीट पर निर्दलीय ने विजय हासिल की।

अब यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि राज्यपाल जीडीएस के कुमारस्वामी को मिलने का समय देकर सरकार बनाने का न्योता देते हैं या सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को पहले बुलाकर कांग्रेस के सपने और अशोक गहलोत की रणनीति पर पानी फेरने का कदम उठाते हैं। माना जा रहा है कि यदि राज्यपाल बीजेपी को सरकार बनाने का पहले न्योता देते हैं तो भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने के साथ ही विधानसभा में बहुमत हासिल करने में भी कामयाब हो जाएगी।

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