भारत में किसान बनें नया विपक्ष, कांग्रेस और अन्य पार्टियां मृतप्राय

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मोहित चौधरी।

भारतीय जनता पार्टी की साल 2014 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी। केंद्रीय सरकार की सफलता लगातार जारी है। एक के बाद एक राज्य में विजय हासिल करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को भारत से लगभग साफ कर दिया है। कांग्रेस के साथ ही वामपंथी पार्टियों और सपा, बसपा, राजद को भी भारत मुक्त करने की ओर अग्रसर है।

एक और जहां भारतीय जनता पार्टी के लिए कांग्रेस, सपा, बसपा और कॉमरेड विपक्ष की भूमिका से गायब होते जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए व BJP की दूसरे राज्यों में चल रही सरकारों के लिए किसान नया विपक्ष बनता जा रहा है।

बात मध्यप्रदेश के मंदसौर की हो, राजस्थान की सीकर की हो या फिर महाराष्ट्र के नासिक से मुंबई कूच कर रहे किसानों की हो, सभी जगह किसानों की मांगे तकरीबन एक जैसी है। किसान संपूर्ण कर्ज माफी की मांग और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

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सबसे ताजा किसान आंदोलन महाराष्ट्र के नासिक से मुंबई की ओर कूच कर रहे करीब 30 हज़ार अन्नदाताओं का है। महाराष्ट्र सरकार को झुकाने के लिए वामपंथी संगठनों, आरएसएस, शिवसेना पार्टी सहित 62 अन्य संगठनों के साथ मिलकर किसान महाराष्ट्र में विधानसभा के लिए कूच कर रहे हैं, संभवता कल तक मुंबई पहुंच चुके होंगे।

महाराष्ट्र में किसान आंदोलन से पहले राजस्थान के सीकर सहित पूरे शेखावाटी एरिया में किसानों ने जोरदार आंदोलन किया। 22 फरवरी को राजस्थान विधानसभा पर कुच करने से पहले बीते साल एक से लेकर 13 सितंबर तक राजस्थान में ऐतिहासिक किसान आंदोलन हुआ। उसके बाद राजस्थान सरकार ने जल संसाधन मंत्री डॉक्टर रामप्रताप के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया। हालांकि कमेटी ने 6 माह के दौरान कोई कार्य नहीं किया, मगर 12 फरवरी को राजस्थान विधानसभा में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा पेश किए गए बजट में लघु एवं सीमांत किसानों का कर्जा माफ किया गया। मुख्यमंत्री ने लघु एवं सीमांत किसानों को ₹50000 तक का कर्जा माफ करने का ऐलान किया। इसके बावजूद किसानों का जयपुर विधानसभा पर कुछ अनवरत चला। हालांकि पुलिस के अत्याचार के बाद यह आंदोलन रद्द कर दिया गया।

इसी तरह से करीब डेढ़ साल पहले मध्यप्रदेश के मंदसौर में किसानों ने जोरदार आंदोलन किया। हालांकि वहां पर पुलिस की गोलीबारी में 7 किसान शहीद हो गए और गए आंदोलन वापस लेना पड़ा। बदले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को आश्वस्त किया कि वह हमेशा उनके साथ हैं और इस बाबत उन्होंने खुद अनशन कर किसानों का समर्थन किया। अब मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के लिए इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुश्किलें खड़े होने की संभावना नजर आ रही है। वसुंधरा राजे की भी राह आसान नजर नहीं आ रही है।

एक तरह से देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी, वामपंथी संगठन और समाजवादी पार्टी सहित बहुजन समाजवादी पार्टी और लालू प्रसाद यादव की राजद अब विपक्ष की भूमिका में नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए देश के किसान ही विपक्ष की भूमिका अदा कर रहे हैं।

संसद और विधानसभाओं में किसानों का प्रतिनिधित्व नहीं होने की अब कोई शिकायत नहीं मिल रही है। क्योंकि किसान एकजुट होकर सड़कों पर उतर आया है और केंद्र व राज्य सरकारों के नाक में दम कर रखा है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि भारत में अब सरकार के खिलाफ किसान ही विपक्ष है और इसकी मांगों को मानने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को तैयार रहना ही होगा।

अब यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को साल 2019 में दोबारा चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के लिए जीतने से पहले देश के किसानों को अपने पक्ष में करना होगा। उनको लागत का डेढ़ गुना मूल्य और 50% लाभांश के साथ-साथ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना ही एकमात्र विकल्प होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यदि ऐसा नहीं करते हैं तो विपक्ष की भूमिका निभाते हुए किसान फिर से कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को सत्ता सौंपने में बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। देखना यह दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी और RSS मिलकर किसानों की समस्या का किस तरह से निदान करते हैं और अपनी सरकार को फिर से सत्ता में लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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