JK lone hospital में नवजात को नहीं मिला NICU, 12 घन्टे बाद मौत

16

जयपुर।

राज्य सरकार के शिशु अस्पतालों की श्रेणी में प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल JK लोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। SMS मेडिकल कॉलेज के नए प्रिंसीपल पद के लिए बेशक JK लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक गुप्ता का नाम सबसे आगे चल रहा होगा, लेकिन जिस अस्पताल की जिम्मेदारी उनके पास है, वहां के हालत ठीक नहीं हैं।

मंगलवार को भर्ती करवाने के 12 घंटें तक अस्पताल में वेंटीलेटर सुविधा न मिलने से एक नवजात की मौत हो गई। दरअसल, 14 मई को चौमू निवासी अनीता सागर की डिलवरी के लिए उसे यहीं के राजेश ग्रेड निजी अस्पताल में ले जाया गया। शुरुआत में डॉक्टर ने नार्मल डिलवरी की बात कही, लेकिन जब दिक्कत आयी तो ऑपरेशन कर बच्चे को गर्भ से बाहर निकाला। नवजात होने पर जब रोया नहीं तो उसे निजी अस्पताल ने चौमू में ही, ‘शिवा निकेतन’ के नाम से क्लिनिक चलाने वाले जेके लोन के सरकारी डॉक्टर योगेश यादव के पास भेजा गया। जहां से डॉ. यादव ने बच्चे को जेके लोन रैफर कर दिया। सोमवार रात 9 बजे नवजात को जेके लोन अस्पताल में लाया गया, जहां उसे अगले दिन मंगलवार सुबह 9 बजे तक वेंटिलेटर नहीं मिल सका। जिसके चलते उसे जनरल वार्ड में ऑक्सीजन पर रखा गया। इसके कुछ देर बाद ही नवजात की मौत हो गई।

लेकिन बड़ा सवाल ये कि 12 दिन पहले 4 मई को ही करोड़ों की लागत से प्रदेश के सबसे बड़े NICU, यानि नवजातों की क्रिटिकल केयर यूनिट का उद्घाटन किया गया था। अस्पताल में 105 बैड की नियोनेटल इन्सेंटिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) का उद्घाटन इस उद्देश्य से किया गया था। दावा किया गया था कि गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चों को अब आईसीयू के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा, लेकिन कल ही 12 घंटें तक एक नवजात को वेंटिलेटर नहीं मिलने सुबह 9 बजे उसकी मौत हो गई।

अस्तपाल प्रशासन के मुताबिक़ NICU के स्टाफ की विशेष ट्रेनिंग पूरी न होने की वजह से NICU में बच्चे शिफ्ट नहीं किये जा रहे। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब नर्सिंग स्टाफ को प्रॉपर ट्रेनिंग ही नहीं मिली थी, तो फिर जल्दबाजी में 4 मई को NICU का उदघाटन ही क्यों किया गया है? इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है।

जेके लोन के NICU में आज पहला बच्चा शिफ्ट किया गया है। उद्घाटन के 12 दिन बाद भी कोई बच्चा नहीं लाया गया था। इसके बाद NICU में आज दोपहर 12 बजे पहला बच्चा शिफ्ट किया गया है। अब यहां पर एकसाथ 60 बच्चों को रखा गया था।

4 मई को यहां पर एनआईसीयू का उद्घाटन किया गया था, लेकिन स्टाफ ट्रेनिंग ना होने के चलते शुरू नहीं किया गया था। हमने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। यहां पर एक बच्चे की मंगलवार को इसी लापरवाही के चलते मौत हो गई थी।

Facebook Comments