दिल, दिमाग, किडनी को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है ‘लूपस’

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आज

लूपस डे विशेष:-
जयपुर
लूपस ऐसा रोग है जो दिमाग को भी प्रभावित कर सकता है। डॉ. इस रोग के समय पर उपचार की सलाह के साथ ही निरंतर व्यायाम करने की सलाह देते हैं। यह गठिया रोग में ही आने वाला एक रोग है। गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत कुमार सिंह का कहना है कि लूपस एक प्रकार का गठिया रोग है, जो कि शरीर के किसी भी अंग (जोड़, किडनी, लिवर, मांसपेशियों, चमडी, नसे व दिमाग) को प्रभावित कर सकता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता में विकार के कारण पैदा होता है जिसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वयं के ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगती है।
डॉ. बताते हैं कि यह रोग महिलाओं में ज्यादा होता है। सामान्यता 15-45 वर्ष के बीच में। लेकिन यह बच्चों व वृद्धावस्था में भी हो सकता है। सभी लोगो में इसकी प्रकृति अलग होती है। कुछ में यह धीरे-धीरे शुरू होता है और शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाता है। वही कुछ में यह विकराल रूप में प्रकट होता है तथा प्राण घातक होता है। अगर किसी में लूपस हल्की अवस्था में है तो भी इसको लगातार निरीक्षण एवं इलाज की जरूरत होती है, क्योंकि बिना इलाज के यह कभी भी विकराल रूप ले सकता है।
लूपस किसको हो सकता है ?
यह महिलाओं में पुरूषों की तुलना में ज्यादा (प्राय: 9 गुना) होता है। सामान्यतया इसकी शुरूआत होने की उम्र 15-45 वर्ष है। अगर यह बच्चों या पुरूषों में होता है तो ज्यादा घातक होता है।
लूपस के रोगियों में निम्न बीमारियां ज्यादा होती हैं-
1. हृदय रोग लकवा

2

. आॅस्टियोपोरोसिस

3. हड्डियों की कमजोरी

4. किडनी की खराबी

5. रक्त की कमी
6. कैंसर

7.चमड़ी के रोग

8. आँखों के रोग

9. बार-बार गर्भपात होना
यह निम्न कारणों से होता है-
1. वातावरण- सूर्य की रोशनी, धूम्रपान, कीटनाश्क व कुछ वायरस के संक्रामण
2. हार्मोन – महिला हार्मोन (एस्ट्रोजन)
3. रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकार
4. आनुवांशिक
इसके क्या लक्षण है ?

1.जोड़ों में दर्द

2. मांसपेशियों में दर्द

3.बुखार

4. मुंह में छाले होना

5. बाल झडना

6. धूप में जाने पर चेहरे पर लाल-गुलाबी चकत्ते हो जाना

7.खून की कमी

8. वजन की कमी, भूख न लगना

9.सांस की तकलीफ

10. पेट, छाती या सिर में दर्द

11.मिर्गी

12. लकवा

13. मानसिक रोग
क्या यह घातक है ?
-हां, बिना उचित इलाज के यह प्राण घातक हो सकती है या प्रभावित अंग को हमेशा के लिए खराब कर सकती है।
क्या इसका इलाज हो सकता है ?
-विज्ञान की तरक्की के साथ, अब लूपस के लिए भी बेहद प्रभावशाली दवाएं उपलब्ध है जो कि बिमारी के विस्तार के हिसाब से दी जाती है। इसका इलाज लम्बा चलता है जितना जल्दी बीमारी का निदान करके उसका इलाज चालू किया जाए इलाज उतना ही प्रभावशाली होता है तथा दवाएं बंद होने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या अन्य चिकित्सा पद्धति जैसे होम्योपैथी, यूनानी, आयुर्वेद, इलेक्ट्रोपेथी द्वारा इसका इलाज संभव है ?
-इसके लिए पर्याप्त शोध नहीं हुआ है, इसलिए कहना संभव नहीं है कि इन पद्धतियों से इलाज संभव है या इनसे आगे नुकसान भी हो सकता है।
क्या खाने पीने से इस पर कुछ फर्क पडता है ?
-धूम्रपान, मदिरापान व अन्य नशाकारक वस्तुऐं निश्चित रूप से बीमारी व दवाओं में साइड इफेक्ट को बढाती है। रोगियों को नियमित रूप से संतुलित आहार लेना चाहिए। खाने पीने की अन्य वस्तुओं के लिए पर्याप्त शोध नहीं हुआ है इसलिए कहना संभव नहीं है।
क्या महिला रोगी गर्भ धारण कर सकती है ?
-लूपस का गर्भधारण करने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पडता है। हालाकि गर्भ धारण करने से पहले बीमारी कम से कम 6 महिने नियन्त्रित होनी चाहिए। गर्भावस्था के समय नियमित रूप से परामर्श आवश्यक है क्योंकि जटिलताओं की संभावना अधिक होती है। प्रसव में भी जटिलताओं की सम्भावना अधिक होती है। इसलिए प्रसव सभी सुविधाओं युक्त अस्पताल में करवाना चाहिए जहाँ इम्यूनोलॉजी/गठिया रोग विशेषज्ञ व आई.सी.यू की सुविधा उपलब्ध हो।
क्या होने वाली सन्तान स्वस्थ होगी ?
-उचित इलाज लेने पर ज्यादातर बच्चें स्वस्थ्य होते है लेकिन 1 से 2 प्रतिशत रोगियों को होने वाली सन्तान लूपस से प्रभावित हो सकती है, परन्तु उचित इलाज से ये 4-6 महीने में ठीक हो जाता है।
क्या महिला रोगी स्तन पान करवा सकती है ?
-हां, महिला रोगी स्तन पान करवा सकती है, परन्तु लूपस के लिए दी जाने वाली दवाऐं शिशु को प्रभावित कर सकती है। इसके लिए अपने गठिया रोग विशेषज्ञ से सम्पर्क करें।
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