महाराष्ट्र का किसान आंदोलन समाप्त, फडणवीस सरकार ने मांगी किसानों की सभी मांगे

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मुंबई।

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नासिक से पैदल मार्च करके मुंबई पहुंचे 35000 से अधिक किसानों लिए राहत की खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद उनकी सभी मांगों को पूरा करने का वादा किया है। वहीं, किसानों ने भी आंदोलन खत्म करने का आश्वासन दिया है। सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन ने मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए किसानों की सभी मांगों पर चर्चा किए जाने की बात कही। उन्होंने बताया, उनकी करीब 12-13 मांगें थीं जिनमें से कुछ हमने मांग ली हैं और उन पर हम लिखित ड्राफ्ट देंगे। मुझे लगता है कि वे हमारे फैसले से संतुष्ट हैं।

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आदिवासी विकास एवं जनकल्याण मंत्री वी सावरा ने बताया कि किसानों की शिकायत है कि जो उनकी जमीन है उससे कम उनके नाम पर है, तो जितनी भी जमीन पर वे खेती कर रहे हैं वह उनके नाम पर होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह मांग मान ली है। मुख्य सचिव इसे देखेंगे और 6 महीने के अंदर इसे लागू किया जाएगा। मीटिंग से पहले महराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था, हमारी सरकार किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक है। मोर्चा के पहले दिन से ही हमलोग किसानों की कई मांगों को लेकर बातचीत की है। शुरुआत से ही जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन किसानों के साथ संपर्क में हैं। हालांकि, किसान पहले से ही मार्च निकालने को लेकर अटल थे।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के किसानों ने कृषि की खस्ता हालत को लेकर बीते 10 महीनों में दूसरी बार राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और विधानसभा तक विरोध मार्च पूरा किया। इस मार्च में पुरुषों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित 35,000 से अधिक किसानों ने छह दिनों से ज्यादा समय में 180 किलोमीटर लंबे मार्च को पूरा किया। अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) की ओर से आयोजित इस मार्च में माकपा के किसान धड़े के किसान लाल टोपी पहने, हाथों में लाल झंडे लिए ड्रम बजाते हुए मार्च में शामिल हुए।

किसानों ने छात्रों की बोर्ड परीक्षाओं में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए रात (सोमवार) को दो बजे ही विद्याविहार के सोमैया मैदान से ऐतिहासिक आजाद मैदान के लिए रवाना हो गए। किसानों की सोमवार दोपहर को महाराष्ट्र विधानसभा की घेराबंदी करने की योजना को देखते हुए सरकार ने किसानों के साथ सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आनन-फानन में छह सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति गठित की और आखिरकार किसानों की मांग को मान लिया गया है।

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