BJP की स्टाइल में इस जोड़ी ने दी मोदी और शाह को करारी शिकस्त

284

जयपुर।

भारतीय जनता पार्टी के नेता व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की वर्तमान में सियासत की सबसे मजबूत जोड़ी को कांग्रेस की नई जोड़ी ने कर्नाटक चुनाव के बाद रणनीति में करारी मात दी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अशोक गहलोत और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी के दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद बीजेपी को सत्ता से दूर रखने में कामयाबी हासिल की है।

साल 2014 से लेकर तब तक यह दूसरा मौका है, जब मोदी और शाह की जोड़ी को कांग्रेस नेताओं द्वारा इस तरह रणनीतिक मात दी गई है। कांग्रेस के अशोक गहलोत और गुलाम नबी आजाद अपनी पार्टी को मिली 78 सीटों के बावजूद सत्ता हासिल करने के लिए 112 सीटों के जादुई आंकड़े के नजदीक जाने के लिए जनता दल सेक्युलर को समर्थन देकर सरकार बनाने के लिए प्रस्ताव दे दिया। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी 104 सीट जीतने में कामयाब रही, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी कांग्रेस के इन दोनों रणनीतिकारों के पैंतरों में फंसी BJP को सत्ता हासिल कर पाने में अब तक कामयाबी नहीं मिल पाई है।

इससे पहले मोदी और शाह की जोड़ी की सियासी रणनीति के आगे कांग्रेस गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी सरकार बनाने में नाकामयाब रही थी। दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने कम सीटें होने के बावजूद सत्ता हासिल की और कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। इससे पहले अशोक गहलोत और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की जोड़ी ने भी गुजरात में राज्यसभा चुनाव के वक्त अहमद पटेल को जिताकर BJP को चौंका दिया था। बीते 4 साल में अमित शाह और नरेंद्र मोदी को यह दूसरी सियासी मात मिली है, जब कांग्रेस के आगे उनके फेंके हुए तमाम पासे असफल हो गए हैं।

पहले राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री, उसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और फिर कांग्रेस के संगठन महासचिव बने अशोक गहलोत की सियासी जादूगरी ने कर्नाटक में कांग्रेस को फिर से सत्ता में रखने के मामले में कामयाबी हासिल की है। गहलोत के इस कदम से न केवल उनका आलाकमान के समक्ष कद बढ़ा है, बल्कि राजस्थान में भी उनके द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर किए जा रहे प्रयासों में बड़ी सफलता हासिल होने की संभावनाओं को बल मिला है। गहलोत का इस तरह से आलाकमान की नज़र में अचानक से सामने आया प्रादुर्भाव गहलोत का सियासी कद बढ़ाएगा, बल्कि कांग्रेस पार्टी के राजस्थान अध्यक्ष सचिन पायलट के लिए आने वाले समय में मुश्किलें पैदा कर सकता है।

Facebook Comments