पेपर 70 का, कॉपियां 100 नंबर की जांची, 92 प्रतिशत छात्र हो गए फैल

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RUHS Pradrashan

जयपुर। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को स्थापित हुए अभी 10 साल भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन विवि में 10 से ज्यादा घपले हर साल सामने आ रहे हैं। ताजा मामला पैरमेडिकल स्टूडेंट्स के कैरयिर से जुड़ा है। विवि ने पहली बार पैरामेडिकल की परीक्षा ली और पहली बार में ही 92 फीसदी बच्चों को फैल कर दिया। अब छात्र दर—दर की ठोकरें खाते फिर रहे हैं, लेकिन उनकी कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही है।

जानकारी के मुताबिक पैरामेडिकल कौंसिल ने इस साल ही आरयूएचएस को परीक्षा आयोजित करवाने के निर्देश दिये थे। विवि ने परीक्षा भी आयोजित करवा ​दी और अब परिणाम भी जारी कर ​दिया, लेकिन यह क्या? विवि के 92 फीसदी छात्रों को फैल कर दिया। फैल हुए छात्रों ने पैरामेडिकल कौंसिल के यहां गुहार लगाई, लेकिन कौंसिल ने साफ कर दिया कि यह मामला विवि स्तर का है, इसलिए वहीं जाओ। छात्रों ने विवि प्रशासन से शिकायत की, लेकिन विवि ने पैरामेडिकल कौंसिल का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया।

यूं किया पूरा खेल

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव भरत बेनीवल ने बताया कि राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा इस साल पहली बार पैरामेडिकल छात्रों की परीक्षा आयोजित करवाई, जिसके परीक्षा परिणाम में 92 प्रतिशत छात्र फैल हो गए। क्योंकि छात्रों की परीक्षा हुई तब पेपर 70 अंक का था, जबकि परिणाम प्रत्येक विषय में 100 अंक के हिसाब से जारी किया गया।

बोनस अंक देने की मांग

बेनीवाल ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक अनिल काजला, सहायक कुलसचिव गोपनीय शाखा राजेश यादव, सहायक कुलसचिव आलोक शर्मा से मिलकर छात्रों ने बोनस अंक देने की मांग की है। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल कि छात्रों को या तो बोनस अंक दिए जाए या फिर 30 नंबर में से कॉलेजों द्वारा इंटरनल अंक भेजे जाएं। परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि अगर राजस्थान पैरामेडिकल कैंसिल छात्रों के इंटरनल अंक भिजवा देती है तो छात्रों का परिणाम इंटरनल अंक जोड़ते हुए पुन: घोषित किया जाएगा।

2100 में से 1800 का भविष्य संकट में

विवि ने इस साल मान्यता जारी करते हुए राजस्थान में 84 पैरामेडिकल कॉलेज शुरू करने की अनुमति प्रदान की थी। यह पहली बार था जब विवि पैरामेडिकल परीक्षा आयोजित कर रहा था। विवि ने 70 अंक का पेपर तैयार कर परीक्षा ले ली, लेकिन बाद में पैरामेडिकल कौंसिल ने बताया कि पेपर तो 100 नंबर का होना चाहिए। क्योंकि इस परीक्षा में इंटरनल के मार्क्स भेजने का प्रावधान ही नहीं है। ऐसे में विवि ने अपने ही हिसाब से गली निकाल पेपर को 100 अंक का मानते हुए जांच कर परिणाम जारी कर दिया। जिसके चलते करीब 2100 छात्र—छात्राओं में से लगभग 92 फीसदी फैल हो गए।

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