अगले 3—4 माह में भाजपा अजेय होने की स्थिति में पहुंच जाएगी

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amit shah vasundhara rajee
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जयपुर।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन का काम आलाकमान का है। अपने तीन दिन के जयपुर दौरे के दौरान दूसरे दिन मीडिया से बात करते हुए बताया कि प्रदेश भाजपा आने वाले 3-4 माह में अजेय की होने की स्थिति में आ जाएगी। प्रदेश में आने वाले समय में भाजपा की ओर से संगठन को मजबूत करने के लिए काम किए जाएंगे।

इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के नेतृत्व के परिवर्तन के सवाल पर कहा कि सरकार अच्छा काम कर रही है। नेतृत्व बदलने का काम केन्द्रीय नेतृत्व का है। शाह ने दावा किया कि संगठन 2014 में भी जीत की स्थिति में था और अभी भी जीत की स्थिति में है, लेकिन चार महीने के भीतर प्रदेश भाजपा को अजेय स्थिति में ला देंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों की ऋण माफी को लेकर पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कर दिया है कि राज्य अपने स्तर पर इस मुद्दे पर निर्णय लें। गौवध को लेकर उन्होंने कहा कि भाजपा शासित प्रदेशों में ये कानून बना हुआ है। जहां तक गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बयान की बात है तो वहां प्रवास के दौरान बात करूंगा कि किस मंतव्य को लेकर यह बात कही गई है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात में भाजपा 150 सीटे जीतेगी।

शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने 106 योजनाओं के जरिये देश के गरीब और दलितों के जीवन स्तर का विकास किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में सबसे लोकप्रिय नेता बनकर सामने आये है। देश के 60 प्रतिशत भू-भाग पर और 55 प्रतिशत जनसंख्या पर भाजपा का राज है। उन्होंने कहा कि उनके अलावा पार्टी के 4 लाख विस्तारक बूथों तक पार्टी को मजूबत करने के लिए निकले हुए हैं। केंद्र में निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्णायक सरकार कार्य कर रही है। जिसके चलते नोटबंदी और जीएसटी का ऐतिहासिक फैसला लागू हो सका है।

शाह ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा कि यह मुद्दा पिछले चार लोकसभा चुनाव से है और पार्टी चाहती है कि कानूनी रूप से और आपसी सहमति से राम मंदिर का निर्माण हो। इसके अलावा दलित के घर खाना खाने के सवाल पर शाह ने कहा कि दलित के घर खाना खाने को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिये। क्रिमीलेयर को लेकर बोलते हुए शाह ने कहा कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक होनी चाहिये और संसद से कानून पारित होना चाहिये।

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