शिक्षकों की पदोन्नति में अटक गया छात्रों की ‘एमफिल-पीएचडी’ का सपना

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-राजस्थान विश्वविद्यालय में 51 में से केवल 17 विभागों में खाली हैं एमफिल—पीएचडी की सीटें

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय से एमफिल—पीएचडी करने का सपना पाले छात्र-छात्राओं का सपना शिक्षकों की पदोन्नति के फेर में अटका गया है। शिक्षकों के प्रमोशन नहीं होने का खामियाजा केवल शिक्षक ही नहीं उठा रहे हैं, बल्कि विवि से पीएचडी करने का सपना पाले सैकड़ों विद्यार्थियों को भी उठाना पड़ रहा है।
दरअसल, विश्वविद्यालय के 51 विभागों और शोध केंद्रों में एमफिल—पीएचडी प्रवेश के लिए इस बार केवल 17 विषयों में सीटें खाली हैं। विवि के 34 विभाग-सेंटर ऐसे हैं जिनमें पीएचडी की एक भी सीट उपलब्ध नहीं है। जिन 17 विभागों में शिक्षकों के पास एमफिल—पीएचडी की सीटें रिक्त हैं, उनमें सबसे ज्यादा 20-20 सीटें एबीएसटी, बिजनेश एडमिनिस्ट्रेशन और पोलिटिकल साइंस में उपलब्ध हैं। इसके अलावा संस्कृत, अर्थशास्त्र और भूगोल विषय में 19-19 सीटें खाली हैं। सभी 17 विभागों में केवल 248 सीटें रिक्त हैं।

इसलिए नहीं है सीटें खाली
विवि में एसोसिएट प्रोफेसर्स के बीते 5 साल से प्रमोशन अटके हुए हैं। साल 2013 से अब तक विवि प्रशासन द्वारा कई बार आवेदन मांगे जा चुके हैं, लेकिन स्क्रूटनी होने के बाद कभी साक्षात्कार नहीं हुए। ऐसे में करीब 275 सह आचार्यों का आचार्य बनने का रास्ता बंद पड़ा है। यदि यह प्रमोशन समय पर हो जाते तो कम से कम 550 सीटें और रिक्त होती, जहां एमफिल—पीएचडी करने के लिए छात्र आवेदन कर सकते थे।

एक शिक्षक इतने छात्रों को करवा सकता है पीएचडी
नियमानुसार विवि का एक प्रोफेसर एक बार में 8 विद्यार्थियों को पीएचडी के लिए गाइड कर सकता है। इसी तरह से एसोसिएट प्रोफेसर 6 स्टूडेंट्स को और असिस्टेंट प्रोफेसर 4 छात्रों को पीएचडी के लिए गाइड कर सकता है।

इनका कहना है-
पांच साल से प्रमोशन अटके पड़े हैं, विवि से कई बार आग्रह किया गया है। इससे न केवल शिक्षकों को नुकसान हो रहा है, बल्कि विवि में शोध कार्यों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

डॉ. ओम महला, सिंडीकेट सदस्य और लोक प्रशासन विभाग के एचओडी

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