दुर्लभ तस्वीरों का अनमोल खजाना: आप भी दंग रह जाएंगे तस्वीरें देखकर-

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मोहित चौधरी।

आजाद भारत और पराधीन भारत की बहुत सारी तस्वीरें आपने देखी होंगी, लेकिन जो तस्वीर हम आपको दिखा रहे हैं, वह संभवत पहली बार देख रहे होंगे। हम आपको दिखा रहे हैं कुछ ऐसी तस्वीरें, जो आपका दिल और दिमाग हिला कर रख देगी।

यह तस्वीर है दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं की। पहले हैं भारत के रविंद्र नाथ टैगोर और दूसरे हैं अल्बर्ट आइंस्टीन। यह दोनों की एक साथ एक मात्र दुर्लभ तस्वीरें दोनों नोबेल पुरस्कार विजेता है। एक ने साहित्य के साथ क्षेत्र में जीता था, और दूसरे ने फिजिक्स में।

ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं इसमें एक भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, यानी मोहनदास करमचंद गांधी है। उनके साथ बैठे हैं दुनिया के जाने वाले शख्स, महान कॉमेडियन चार्ली चैपलिन।

ऊपर के चित्र में जो आपको तस्वीर नजर आ रही है, उसमें भारत के स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु की है। अंग्रेजों ने इनके फांसी लगाने से पहले एक पोस्टर जारी किया था। यह पोस्टर जगह-जगह चिपकाए गए थे। यह आखरी पोस्टर है, जिसमें भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु नजर आ रहे हैं।

यह तस्वीर है महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी विचारक चंद्रशेखर आजाद की। आज़ाद को अंग्रेजों द्वारा पकड़ने या मारने का अंतिम प्रयास किया गया था। चंद्रशेखर आजाद ने स्वयं को गोली मारकर कभी भी अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार नहीं की। यह तस्वीर है चंद्रशेखर आजाद की, उनके द्वारा खुद को गोली मारने के बाद की, जो अंग्रेजों द्वारा ली गई थी।

तस्वीर में नजर आ रहे हैं दुनिया के महान विचारक और भारत के युवा आदर्श स्वामी विवेकानंद। स्वामी विवेकानंद आज भी भारत में प्रत्येक युवा के आदर्श पुरुष है। महज़ 39 साल की उम्र में स्वर्ग सुधारने वाले स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूरी दुनिया को अपना मुरीद बना लिया था।

भारत को आजादी दिलाने के लिए विदेश जाकर आजाद हिंद फौज का गठन करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी सुभाष चंद्र बोस। तस्वीर में नजर आ रहे हैं अपने माता-पिता के साथ। सुभाष चंद्र बोस पहले अंग्रेजी सेना में थे, लेकिन देश को आजाद कराने के लिए उन्होंने भारत की खुद की सेना का गठन किया था।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम। यह दुर्लभ तस्वीर डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के कॉलेज के दिनों की है, जब वह दोस्तों से घिरे रहते थे। डॉक्टर कलाम ने देश को मिसाइल की सौगात दी, जिसके कारण उनका नाम मिसाइल मैन पड़ा।

भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त सन 1947 में लिया गया है। यह दुर्लभ चित्र दोनों देशों की त्रासदी का आखरी नमूना है। उस वक्त हजारों की संख्या में लोगों को कत्लेआम किया गया था। बंटवारे का दर्द आज भी दोनों मुल्कों के लोग भुगत रहे हैं, लेकिन सियासत कब किसको बख्श रही है।

पूरी दुनिया में तानाशाह के नाम से जाने जाने वाले हिटलर। जब भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस से मिले तो वह भी गदगद हो गए। सुभाष चंद्र बोस ने हिटलर से भारत की आजादी के लिए जर्मन से मदद मांगी थी। दोनों नेताओं के संबंध बहुत सौहार्दपूर्ण थे।

भारत आज दुनिया का वह देश है, जहां सबसे अधिक लंबा चौड़ा रेलवे तंत्र है। लेकिन इसकी शुरुआत हुई थी 1883 में, जब भारत में पहली ट्रेन मुंबई से ठाणे के बीच चलाई गई थी। यह उसी ट्रेन का दुर्लभ चित्र है।

इस चित्र में भारत के 2 महान नागरिक। पहले हैं रविंद्र नाथ टैगोर, जिन्होंने नोबेल पुरस्कार जीता था। और दूसरे हैं भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन।

इस तस्वीर में महात्मा गांधी के साथ नजर आ रही है देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी। यह तब की तस्वीर है, जब देश तकरीबन आजाद हुआ था। तब इंदिरा गांधी पर छोटी थीं और महात्मा गांधी अक्सर बिस्तर पर ही विश्राम किया करते थे।

यह तस्वीर यूनिवर्सिटी ऑफ महाराष्ट्र के एक स्टूडेंट की है। 1948 में वह दौर था, जब लालटेन के उजाले में स्टूडेंट्स अक्सर रात को पढ़ाई किया करते थे। रात को नींद के वक्त सो नहीं जाए, इसलिए अपने बालों की चोटी को दीवार में गढी कील से बांध कर बैठा करते थे।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के हाथों लिखा गया खत। यह खत आज भी भारत के लिए बेहद दुर्लभ चीजों में से एक है। इसको लाइब्रेरी में सुरक्षित रखा गया है।

यह दुर्लभतम तस्वीर है संभवत देश के पहले मिलेनियर उद्योगपति टाटा परिवार की। इस दुर्लभ तस्वीर में नजर आ रही है टाटा परिवार की तीन पीढ़ियां। जिसने नवल टाटा, रतन टाटा और नोएल टाटा बैठे हैं।

देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई का यह दृश्य करीब 38 साल पहले का है। 1980 में फ्लोरा फाउंटेन की यह दुर्लभ तस्वीर ली गई थी। तब और अब में कितना अंतर है, आप को देख सकते हैं।

गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे, जो कि बीते 5 साल से लोकपाल लागू करने के लिए देश में संघर्ष कर रहे हैं। अन्ना हजारे की एक दुर्लभ तस्वीर तब की है, जब वह फौज में हुआ करते थे।

यह है भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी। कहा जाता है कि प्रणब मुखर्जी को सिगार पीने का बहुत शौक था। बरसों पुरानी यह तस्वीर इस बात को साबित भी करती है।

यह आखिरी तस्वीर है जानेमाने अंग्रेजी अखबार द हिंदुस्तान टाइम्स की। देश की आजादी के बाद द हिंदुस्तान टाइम्स का यह पहला एडिशन था। इसका दुर्लभ पेज आज भी लाइब्रेरी में सुरक्षित है।

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