ट्रोमा सेंटर लैब कि मशीन तीन दिन से खराब, मरीजों की जांच के लिए निजी जांचकर्ताओं के पास जाना पड़ा

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Savai Mansingh Hospital
Nationaldunia.com

जयपुर।

सवाई मानसिंह अस्पताल में प्रबंधन की अनदेखी आम बात है, लेकिन जब बात आपातकालीन सेवाओं की हो तो फिर स्थिति ज्यादा सोचनीय हो जाती है। बीते तीन दिन से यहां पर ट्रोमा में बेहद जरूरी एबीजी जांच की मशीन ही खराब पड़ी है। गंभीर मरीजों के लिए ब्लड की यह जांच बेहद आवश्यक होती है। इस जांच के बिना मरीज का उपचार होना मुश्किल होता है।

ब्रेन डैड होने या दिमाग में चोट लगने की स्थिति में मरीजों की जान बचाने के लिए तुरंत एबीजी जांच की जाती है। इसी जांच के आधार पर मरीज को आॅक्सीजन गैस सप्लाई का निर्णय लिया जाता है। जो मरीज ब्रेन डैड होते हैं या वेंटिलेटर पर अंतिम सांस ले रहे होते हैं, उन मरीजो की सुबह और शाम, दोनों वक्त ये जांच की जाती है, लेकिन ट्रोमा सेंटर की बायोकैमेस्ट्री लैब में एबीजी मशीन पिछले तीन दिन से खराब पड़ी है। इसके अभाव में मरीजों के परिजनों को प्राइवेट लैब पर जांच करवानी पड़ रही है। एक जांच करीब 400-500 रुपए की होती है। सबसे अहम बात यह है कि वेंटिलेटर पर मरीज की दोनों वक्त यह जांच होती है, उसी के आधार पर आगे का उपचार किया जाता है। ट्रोमा सेंटर से मरीजों के परिजनों को रोड क्रॉस करके सवाई मानसिंह अस्पताल के बाहर निजी जांचकर्ताओं के पास जाना पड़ रहा है। इससे भी गंभीर है कि यह जांच मरीजों के लिए बहुत अर्जेंट होती है, जिसकी आवश्यकता होने पर मात्र दो मिनट में जांच करके देनी होती है, किंतु मशीन खराब होने के कारण जांच में कम से कम एक घंटा लग रहा है।

मशीनें अब भी ठेकेदारों के भरोसे
आपको बता दें कि हाल ही में सवाई मान सिंह अस्पताल में सेंट्रिफ्यूज मशीन फटने से बेहद दर्दनाक हादसा हुआ था। इसके बावजूद ट्रोमा लैब में रात्रिकालीन समय में कोई स्थाई स्टाफ या डॉक्टर नही होते। इसके चलते ठेकेदार के कर्मचारी सभी मशीनों को मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जिससे हादसे होने की संभावना बनी रहती है। मेडिकल कौंसिल आॅफ इंडिया के निर्देशानुसार लैब इंचार्ज कम से कम एमबीबीएस डॉक्टर ही हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ट्रोमा लैब का इंचार्ज डॉ धर्मवीर यादव को बना रखा है, जो की एमएससी पीएचडी है। इस तरह से देखा जाए तो यह नियुक्ति मेडिकल कौंसिल के नियमो की धज्जिया उड़ा रही है।

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