… दस्त लगने पर ‘कृष्ण भगवान’ को लेना पड़ा था अफीम का नशा!

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जयपुर।

सृष्टि के रचयिता! सृष्टि के पालनहार और सृष्टि के संहारकर्ता! जिन्होंने पूरे ब्रह्मांड की रचना की! उसके जीव-जंतु, फूल, पुष्प, पहाड़, पत्थर, हर महंगी से महंगी और सस्ती से सस्ती प्राकृतिक चीजों का निर्माण किया, उस सृष्टि के रचयिता को दस्त होने पर कुख्यात हो चुकी आधुनिक औषधि अफीम की डोज देनी पड़ी थी।

1 दिन ऐसा हुआ, जब कृष्ण भगवान को गांव की महिलाओं ने कतार लगाकर, उनका पसंदीदा तरल मक्खन खिलाया। शाम तक भगवान कृष्ण मक्खन चाटते रहे, लेकिन उसके बाद जो भगवान कृष्ण के साथ हुआ, वह उनको हमेशा याद रहेगा। शाम होते-होते कृष्ण भगवान की हालत ऐसी हुई, कि उनको भयानक दस्त लग गए। देर रात जयपुर से डॉक्टर बुलाए गए, लेकिन उसके बावजूद कोई आराम नहीं हुआ। दूसरे दिन सुबह मुंह लटकाए बैठे कृष्ण की स्थिति यह थी, कि किसी से बात करने तक की हिम्मत नहीं हो रही थी।

तब किसी गांव वाले ने उनको अफीम की एक डोज देने की सलाह दी। भगवान कृष्ण की बदत्तर होती हालात और दस्त नहीं रुकने के कारण उनको बदनाम हो चुकी आधुनिक औषधि, अफीम की एक डोज लेनी पड़ी। उसके कुछ ही समय बाद भगवान कृष्ण का लूज मोशन ठीक हुआ और वह सामान्य हो सके।

यह घटना उन भगवान कृष्ण के साथ नहीं घटी, जिन्होंने सृष्टि की रचना की है और पालनहार करते हैं, बल्कि उनके साथ हुई थी, जिन्होंने ऐतिहासिक धारावाहिक महाभारत में भगवान कृष्ण का किरदार निभाया था। जी हां! हम बात कर रहे हैं नितीश भारद्वाज की। और उनकी यह कहानी सुनाने वाले हैं, महाभारत में महान किरदार निभाने वाले द्रोणाचार्य उर्फ सुरेंद्र पाल सिंह, जो गुरुवार को जयपुर में थे। उन्होंने पिंक सिटी प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए यह रोचक और गंभीर प्रसंग सुनाया।

यह वाकया घटित हुआ था, जयपुर में दूदू के पास महला गांव में। द्रोणाचार्य उर्फ सुरेंद्र पाल बताते हैं कि एक बार वह किसी फिल्म की शूटिंग करने के लिए जयपुर के पास इस गांव में ठहरे हुए थे। तब तक महाभारत धारावाहिक के चलते उसके सभी किरदार निभाने वाले कलाकार लोगों की नजर में हीरो बन चुके थे। शूटिंग के वक्त गांव वालों को जब पता चला कि महाभारत के भगवान कृष्ण उनके ही गांव में आए हुए हैं, तो उन्होंने भगवान कृष्ण को मक्खन खिलाने की जिद पकड़ ली। आस-पास के गांव से आने वाले लोगों की भारी भीड़ जुट गई। उनको संभालना पुलिस के लिए भी बहुत भारी हो गया। तब निर्माता-निर्देशक और खुद कृष्ण का किरदार निभाने वाले नितीश भारद्वाज ने यह निर्णय लिया, कि वह एक जगह बैठ जाएंगे और ग्रामीण महिलाएं कतारबद्ध होकर उनको मक्खन खिलाएंगी। लेकिन शर्त यह थी, कि भगवान कृष्ण उर्फ नीतीश भारद्वाज जितना चाहेंगे, उतना ही मक्खन खाएंगे, कोई महिला अधिक मक्खन खिलाने की जिद नहीं करेगी। किंतु आस-पास के गांव की महिलाओं की कतार इतनी लंबी थी, कि शाम तक कृष्ण मक्खन खाते रहे। जब यह सारा कार्यक्रम खत्म हुआ तो जो शुरू हुआ, वह घटनाक्रम दूसरे दिन दोपहर तक अफीम खाने के बाद ही खत्म हुआ।

बेहद सरल स्वभाव हंसमुख और व्यवहार कुशल द्रोणाचार्य उर्फ सुरेंद्र पाल पत्रकारों से करीब 1 घंटे तक प्रेस क्लब में बतियाते रहे। उनकी बातों को और सहज स्वभाव को देखकर कहीं भी ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा था, कि यह व्यक्ति वही है, जिसमें करीब 30 साल पहले महान धारावाहिक महाभारत में विश्व के श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन के गुरु द्रोणाचार्य का किरदार निभाया था।

द्रोणाचार्य और सुरेंद्र पाल राजस्थान के पाली जिले से संबंध रखते हैं। पाली में उनके दादाजी निवास करते थे, बाद में वह परिवार समेत उत्तर प्रदेश चले गए। बहरहाल, सुरेंद्र पाल मुंबई में निवास करते हैं और भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक हैं। वह किसी कार्यक्रम के सिलसिले में गुरुवार को जयपुर में थे। उन्होंने पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से मुलाकात की। उसके बाद उन्होंने नारायण सिंह सर्किल स्थित पिंक सिटी प्रेस क्लब के पदाधिकारियों और कई अन्य पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत की।

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