चीन को करारा जवाब, भारत ने कहा: प्रादेशिक अखंड़ता से नहीं करेंगे समझौता

55

नेशनल दुनिया, नई दिल्ली।

भारत और चीन लगभग समान ताकत वाले राष्ट्र बन चुके हैं। क्षेत्रफल, जनसंख्या सहित कई मामलों में भले ही भारत पीछे हों, लेकिन जिस तरह से दुनिया में हिंदूस्तान का डंका बजता जा रहा है उससे चीन खौफ खाने लगा है। भारत अब चीन को सीधा जवाब देने लगा है।

पाकिस्तान के क्षेत्रफल का सीना चीरकर बनाई जा रही ‘वन बेल्‍ट, वन रोड’ के लिए आयोजित हो रहे सम्‍मेलन का भारत ने बहिष्‍कार किया है। इससे बिलकुल साफ है कि भारत प्रादेशिक अखंड़ता के मामले में किसी भी राष्ट्र के आगे नहीं झुकेगा। भारत चीन में रविवार से आयोजित हो रहे इस सम्‍मेलन मेें भाग नहीं ले रहा।

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कोई भी देश इस तरह कि किसी परियोजना को नहीं स्वीकार करेगा, जो उसकी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता पर आंच आने के लिए चल रही हो। भारत ने कहा कि एक दूसरे देशों के बीच संपर्क परियोजनाओं को इस तरह से आगे बढ़ाने की जरूरत है कि इससे दूसरे देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान हो।
बताया गया है कि भारत हमेशा से ही चीन से इस परियोजना पर सकारात्मक बातचीत की अपील करता रहा है। इतना ही नहीं भारत आज भी चीन से इस मसले पर सकारात्मक जवाब की प्रतीक्षा कर रहा।

हालांकि पहले ही माना जा रहा था कि इस सम्‍मेलन में भारत भाग नहीं लेने वाला। सूत्र बताते हैं कि भारत ने पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे। चीन यहां पर अन्‍य देशों के साथ मिलकर पोर्ट, रेलवे और सड़क के संपर्क विकसित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना के लिए दुनिया का समर्थन जुटाने के लिए यह सम्मेलन आयोजित कर रहा हैै। जिसका बायकॉट करने का भारत ने निर्णय लिया है।

इस प्रोजेक्‍ट का एक हिस्‍सा पाक अधिकृत कश्‍मीर के अंदर से होकर गुजर रहा है। जिसे चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरीडोर भी कहा जाता है। पीओके के अंदर होने के कारण भारत शुरू से इस बात का विरोध करता रहा है। बताया जाता है कि पीओके पाकिस्‍तान का नहीं बल्कि भारत से हथियाया हुआ हिस्‍सा है।

इस आयोजन के शुरू होने में महज कुछ घंटे का ही समय रह गया है, लेकिन भारत के विदेश विभाग की ओर से शनिवार शाम तक किसी भी प्रकार की आधिकारिक टिप्‍पणी नहीं की थी। भारत के द्वारा इस सम्मेलन में बायकॉट करने की बात उस वक्‍त सामने आई है, जब शुक्रवार को भारत के नेपाल ने भी शिरकत करने के लिए हां भर दी। हमारे पड़ोसी राष्ट्रों में श्रीलंका और परंपरागत प्रतिद्धंद्धि पाकिस्‍तान पहले से ही इस आयोजन में हिस्‍सा लेने जा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका ने यू-टर्न लेते हुए इस फोरम में शामिल होने पर अपनी सहमति दे दी है।

Facebook Comments